महानगर पालिका जोन-3 में नागरिकों की दुर्दशा: जन्म प्रमाण पत्र के लिए घंटों लाइन, ऑफलाइन फॉर्म जमा कराने के बाद भी ऑनलाइन भरना अनिवार्य!
उपायुक्त राहुल पंचभूते और जोसेफ मैडम पर जानबूझकर परेशान करने का आरोप!
चंद्रपुर/महाराष्ट्र: महानगर पालिका जोन क्रमांक 3 में जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया नागरिकों के लिए सिरदर्द बन गई है। घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद ऑफलाइन फॉर्म जमा करने वाले लोगों को आखिरकार ऑनलाइन फॉर्म भी भरने को मजबूर किया जा रहा है। इस उलझन भरी व्यवस्था ने आम नागरिकों में गुस्सा और हताशा पैदा कर दी है।
नागरिकों का कहना है कि सुबह से शाम तक कार्यालय के बाहर लंबी लाइन लगती है। गर्मी, थकान और छोटे बच्चों को साथ लेकर इंतजार करने के बाद जब कोई व्यक्ति ऑफलाइन फॉर्म जमा करता है, तो कर्मचारी बताते हैं कि “ऑनलाइन भी भरना पड़ेगा”। सवाल उठता है – अगर ऑनलाइन फॉर्म अनिवार्य है तो ऑफलाइन फॉर्म क्यों भरवाया जा रहा है? यह दोहरी प्रक्रिया क्या है? समय और ऊर्जा की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं।
“जानबूझकर हो रही परेशानी”
पीड़ित नागरिकों ने सीधे उपायुक्त राहुल पंचभूते और जोसेफ मैडम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि यह सारी उलझन जानबूझकर पैदा की जा रही है। एक प्रभावित नागरिक ने बताया, “हम घंटों लाइन में लगते हैं, फॉर्म जमा करते हैं, फिर कहा जाता है ऑनलाइन भी करो। यह सिस्टम नहीं, साजिश लगती है।”
जोन-3 के कार्यालय में इस दोहरी व्यवस्था के कारण बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। कई लोगों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
- महानगर पालिका प्रशासन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रक्रियाएं क्यों चला रहा है?
- क्या यह नागरिकों को जानबूझकर परेशान करने की रणनीति है?
- उपायुक्त राहुल पंचभूते और संबंधित अधिकारी जोसेफ मैडम इस मसले पर क्या सफाई देंगे?
महानगर पालिका आयुक्त को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। नागरिकों की सुविधा के बजाय उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। डिजिटल इंडिया के युग में ऐसी पुरानी और जटिल व्यवस्था नागरिकों के साथ अन्याय है।
नागरिकों की मांग: या तो पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाए या ऑफलाइन को ही अंतिम माना जाए। दोहरी प्रक्रिया बंद होनी चाहिए।
यह खबर जोन-3 के सैकड़ों नागरिकों की पीड़ा को बयां करती है, जो रोजाना प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। प्रशासन को अब जवाब देना होगा।
