चंद्रपूर कांग्रेस में सियासी भूचाल: 15 नगरसेवक अज्ञात पर्यटन पर, धानोरकर गुट की बड़ी चाल!

चंद्रपूर कांग्रेस में सियासी भूचाल: 15 नगरसेवक अज्ञात पर्यटन पर, धानोरकर गुट की बड़ी चाल!



चंद्रपूर: कांग्रेस में नगरसेवकों की पलटवार और गुटबाजी अब चरम पर पहुंच गई है। खासदार प्रतिभाताई धानोरकर समर्थक गुट ने 15 नगरसेवकों को अज्ञात पर्यटन स्थल पर भेजकर बड़ा दांव खेला है। इनमें आमदार विजय वडेट्टीवार गुट के 5 नगरसेवक भी शामिल हैं। इस घटनाक्रम से राजनैतिक गलियारों में खलबली मच गई है।

सूत्रों के अनुसार, धानोरकर गुट की इस ‘पर्यटन योजना’ का मुख्य लक्ष्य गटनेता 'राजेश अडूर' को उनके पद से हटाना है। जवाब में वडेट्टीवार गुट ने भी अपने बचे हुए 11 नगरसेवकों को तुरंत ‘देवदर्शन’ के नाम पर एकजुट कर लिया है।

 दलित होने का ‘अपराध’? अडूर का सनसनीखेज आरोप
इस बीच गटनेता राजेश अडूर ने आरोप लगाया है कि उन्हें पद से हटाने की साजिश सिर्फ इसलिए रची जा रही है क्योंकि वे दलित समाज से हैं।


अडूर ने कहा, “कुछ नेता मुझे गटनेता पद से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे कोई राजनैतिक कारण नहीं, बल्कि सामाजिक मानसिकता है। दलित होने का ‘अपराध’ मुझे भुगतना पड़ रहा है।”

उन्होंने दावा किया कि बहुसंख्यक नगरसेवक उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और विरोधियों के पास गटनेता बदलने का संख्याबल नहीं है। कल रात से कई नगरसेवकों के फोन ‘नॉट रिचेबल’ हो गए हैं, जिसे अडूर ने साजिश का हिस्सा बताया।

 संख्याबल और पुरानी रंजिश
चंद्रपूर महानगरपालिका में कांग्रेस के कुल 27 नगरसेवक     हैं। पिछले कुछ दिनों में धानोरकर गुट पहले ही वडेट्टीवार गुट के 5 नगरसेवकों को अपनी ओर मिला चुका है। सूत्रों की मानें तो वडेट्टीवार गुट के बाकी नगरसेवकों में से 3 और धानोरकर गुट में शामिल होने को तैयार बैठे हैं। 

नगरपालिका चुनाव के ठीक बाद से दोनों गुटों के बीच नगरसेवकों की खींचतान चल रही थी, जो दिल्ली हाईकमान तक पहुंच गई थी। मेयर पद धानोरकर गुट को और गटनेता पद वडेट्टीवार गुट को देने का ढ़ाई-ढ़ाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था। 


लेकिन स्थायी समिति में धानोरकर समर्थकों को जगह न देने और सभागृह नेता पद खुद संभालने के फैसले से वडेट्टीवार गुट नाराज था। इसी असंतोष का फायदा धानोरकर गुट ने उठाया।

 क्या टूटेगा वडेट्टीवार की जादू?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर आमदार विजय वडेट्टीवार अपने नगरसेवकों को वापस नहीं ला सके और राजेश अडूर का गटनेते पद बचाने में असफल रहे, तो चंद्रपूर कांग्रेस में धानोरकर गुट का एकछत्र राज कायम हो जाएगा। इससे पहले विधान परिषद चुनाव में भी वडेट्टीवार के कई समर्थक पलट चुके थे।

यह पूरा घमासान कांग्रेस की आंतरिक एकता पर सवाल खड़ा कर रहा है। पद की लड़ाई अब जातीय एंगल भी ले चुकी है। अभी तक दोनों गुटों या पार्टी हाईकमान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और आगे का राजनीतिक समीकरण इस सियासी टूर पर निर्भर करता दिख रहा है।
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