महाराष्ट्र बजट पर सांसद प्रतिभा धानोरकर का तीखा प्रहार: '2 लाख की कर्जमाफी तो किसानों की जख्मों पर नमक छिड़कना, 7/12 को पूरी तरह शून्य करो'

महाराष्ट्र बजट पर सांसद प्रतिभा धानोरकर का तीखा प्रहार: '2 लाख की कर्जमाफी तो किसानों की जख्मों पर नमक छिड़कना, 7/12 को पूरी तरह  शून्य  करो





चंद्रपुर, 7 मार्च 2026: महायुति सरकार द्वारा पेश किए गए महाराष्ट्र बजट को कांग्रेस सांसद प्रतिभा धानोरकर ने 'संख्याओं का जादू और घोषणाओं की बौछार' करार देते हुए जमकर ललकारा है। उन्होंने 2 लाख रुपये तक की किसान कर्जमाफी को 'बलि राजा के दुख पर नमक छिड़कने जैसा' बताते हुए कहा कि यह किसानों को छलावा मात्र है। धानोरकर ने मांग की है कि किसानों के 7/12 रिकॉर्ड को पूरी तरह से शून्य किया जाए, तभी उन्हें सच्ची राहत मिलेगी।

सांसद धानोरकर ने कहा, "आज का किसान लाखों रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, और सरकार मात्र 2 लाख का लॉलीपॉप दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रही है। यह किसानों की जख्मों पर नमक छिड़कने का निंदनीय कृत्य है। हमारी मांग साफ है- 7/12 को पूरी तरह कोरा करो, तभी किसान को राहत मिलेगी।" उन्होंने विदर्भ के कपास, सोयाबीन और धान उत्पादक किसानों के लिए गारंटीड न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकार के मौन को कायरतापूर्ण बताया। "एक तरफ फसल का भाव नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ ऊंट के मुंह में चना डालने वाली कर्जमाफी देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है।"

बजट में युवाओं और मध्यम वर्ग की उपेक्षा पर भी धानोरकर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा, "शिक्षित युवाओं को नौकरी देने के बजाय 'डिजिटल सपने' दिखाकर बेरोजगारों का मजाक उड़ा दिया गया है। महंगाई से जूझते मध्यमवर्गीय परिवारों और गृहिणियों को राहत के नाम पर कागजी योजनाओं का लॉलीपॉप थमा दिया। यह बजट काश्तकारों, किसानों और युवाओं का विश्वासघात है।"

चंद्रपुर-वनी-आरनी लोकसभा क्षेत्र सहित पूरे विदर्भ को बजट में धोखा मिलने का आरोप लगाते हुए सांसद ने सिंचाई परियोजनाओं, औद्योगिक विकास और स्थानीय बुनियादी ढांचे के लिए किसी विशेष प्रावधान न होने पर नाराजगी जताई। "सरकार ने विदर्भ के मुंह पर फिर से ताला जड़ दिया है। यह दिशाहीन और जनविरोधी बजट है, जिसका मैं खुलकर विरोध करती हूं।"

धानोरकर की यह टिप्पणी महाराष्ट्र  चुनावों  के  समय आई है, जहां किसान और युवा मुद्दे प्रमुखता से उभर रहे हैं। कांग्रेस ने राज्य स्तर पर इस बजट के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि महायुति सरकार इसे 'किसान हितैषी' बताने पर तुली हुई है। राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है- क्या यह बजट वाकई 'मराठी मानुष' की उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
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