⚫ ताडोबा के जंगलों पर मंडराता संकट: बंडू धोतरे का अनशन तीसरे दिन, सांसद प्रतिभा धानोरकर का साथ—कोर्ट ने भी ली सुगबुगाहट!
चंद्रपूर, 9 मार्च 2026: ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर को चीरने वाले लोहारडोंगरी लोह खनन प्रोजेक्ट के खिलाफ पर्यावरण योद्धा बंडू धोतरे का 'अन्नत्याग सत्याग्रह' तीसरे दिन भी धधक रहा है। जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने डटे धोतरे की जंग को मिला नया हौसला—चंद्रपूर की सांसद प्रतिभा धानोरकर ने उन्हें भेंट देकर खुला समर्थन दिया। धानोरकर ने न सिर्फ धोतरे की 16 लंबित मांगें सुनीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार को कड़ा संदेश भी दिया: "जंगल उजाड़कर आर्थिक लालच मत पूरा करो, वरना इंसानी जानों का खून बहना तय है!"
इस आंदोलन में पहुंचीं धानोरकर के साथ थे पूर्व महापौर संगीता अमृतकर, पार्षद सुनंदा धोबे, पूर्व पार्षद गोपाल अमृतकर, प्रो. डॉ. योगेश दुधपचारे, प्रोफेशनल कांग्रेस चेयरमैन रामकृष्ण कोंड्रा, पूर्व पार्षद अशोक नागपुरे, प्रतिभा पेंदोर, शहजाद शेख और आशिष बोन्डे जैसे स्थानीय नेता। धानोरकर ने साफ कहा, "यह प्रोजेक्ट ताडोबा के मुख्य टाइगर कॉरिडॉर को काटेगा। 18,025 पेड़ कटेंगे, बाघों का रास्ता तबाह होगा और जैव विविधता का अपूरणीय नुकसान होगा। चंद्रपूर में पिछले 5 सालों में 200 से ज्यादा लोग वन्यजीव संघर्ष में मारे गए, 2025 में ही 47 बेगुनाह शिकार बने। आर्थिक नफे के लिए निसर्ग और मानव जीवन का दांव पर लगाना बंद करो!"
धोतरे की मांगें सिर्फ खनन रोकने तक नहीं—राज्य सरकार की 2021 तकनीकी समिति की रिपोर्ट लागू करना, बिबट्या समस्या से मुक्ति के लिए 'ग्राम योजना', बाघों की 'कैरिंग कैपेसिटी' अध्ययन और राष्ट्रीय महामार्ग पर वन्यजीव मिटिगेशन प्लान शामिल हैं। 25,000 से ज्यादा लोगों ने साइन कैंपेन से विरोध जताया है। धानोरकर ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएम देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है, जिसमें वन्यजीव मंजूरी तुरंत रद्द करने की गुजारिश की गई। "मैं संसद और मंत्रालयों में इसकी पैरवी करूंगी—जनता की आवाज दबने नहीं दूंगी!"
यह लड़ाई अब राष्ट्रीय पटल पर गूंज रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें सनफ्लैग आयरन एंड स्टील कंपनी के 35.94 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर खनन का मुद्दा है। पूर्व सीएम आदित्य ठाकरे ने भी यूनियन मंत्री को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट रोकने की मांग की है। बीबीसी मराठी के अनुसार, कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
एक्टिविस्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि यह खनन ताडोबा की पारिस्थितिकी को हमेशा के लिए बर्बाद कर देगा—हवा-जल प्रदूषण, पेड़ों का सफाया और वन्यजीवों का विस्थापन। इंस्टाग्राम पर वायरल एक वीडियो में सवाल उठा: "दुनिया में लोहा कहीं और खत्म हो गया क्या, जो अब टाइगर कॉरिडोर को उड़ाना है?" आंदोलन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाईं हैं, जहां स्थानीय लोग 'सेव टाइगर कॉरिडोर' के बैनर के साथ खड़े दिख रहे।
क्या खनन माफिया की लालच पर लगाम लगेगी, या ताडोबा के बाघों की दहाड़ दिल्ली तक पहुंचेगी? बंडू धोतरे का अनशन जारी है—सरकार की नजरें अब कोर्ट और जनआंदोलन पर टिकी हैं। यह जंग पर्यावरण बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सांसों की है!





