१८५७ के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी वीर बाबूराव पुल्लेसूर शेडमके की जयंती पर आदिवासी कांग्रेस का भावपूर्ण अभिवादन

१८५७ के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी वीर बाबूराव पुल्लेसूर शेडमके की जयंती पर आदिवासी कांग्रेस का भावपूर्ण अभिवादन



चंद्रपुर : १८५७ के महान स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज की शौर्यगाथा लिखने वाले वीर बाबूराव पुल्लेसूर शेडमके की जयंती के पावन अवसर पर आदिवासी कांग्रेस कमेटी ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। 

आदिवासी कांग्रेस की जिल्हाध्यक्ष गुंजन येरने ने इस मौके पर एक विशेष संदेश जारी करते हुए कहा, “देश की आजादी के लिए प्राणपण से लड़ाई लड़ने वाले, अन्याय के खिलाफ बुलंद आवाज उठाने वाले और आदिवासी समाज की शौर्य परंपरा को संरक्षित रखने वाले महान क्रांतिकारी वीर बाबूराव पुल्लेसूर शेडमके का कार्य आज भी प्रेरणादायी है। उनके शौर्य, त्याग और स्वाभिमान भरे संघर्ष को कोटी-कोटी प्रणाम!”


गुंजन येरने ने आगे जोड़ा कि वीर शेडमके ने न सिर्फ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ डटकर मुकाबला किया, बल्कि आदिवासी समाज को एकजुट कर स्वाभिमान की लड़ाई का नया आयाम दिया। आज के युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से सीख लेने की जरूरत है, ताकि देशभक्ति और न्याय की भावना जीवंत रहे।


आदिवासी कांग्रेस कमेटी के इस अभिवादन कार्यक्रम में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया और वीर शेडमके के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर सभी ने संकल्प लिया कि उनके बलिदान को भुलाया नहीं जाएगा और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष जारी रहेगा।


वीर बाबूराव पुल्लेसूर शेडमके की जयंती देशभर के स्वतंत्रता प्रेमियों के लिए एक यादगार दिन बन गई है, जहां उनकी अमर गाथा एक बार फिर से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है।
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