चंद्रपुर कैंसर अस्पताल पर रैंसॉमवेयर हमला: हैकर्स ने मांगे 90 लाख रुपये, मरीजों की जान पर संकट

चंद्रपुर कैंसर अस्पताल पर रैंसॉमवेयर हमला: हैकर्स ने मांगे 90 लाख रुपये, मरीजों की जान पर संकट


चंद्रपुर: नामी कैंसर केयर फाउंडेशन के कैंसर अस्पताल के मुख्य सर्वर पर साइबर हमलावरों ने रैंसॉमवेयर हमला कर दिया है। हैकर्स ने अस्पताल का अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय डेटा लॉक कर दिया है। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने चंद्रपुर साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है।

1 जून की सुबह जब अस्पताल में मरीजों का सामान्य कामकाज चल रहा था, तभी आईटी विभाग को मुख्य सर्वर में तकनीकी खराबी का पता चला। जांच के दौरान सामने आया कि सर्वर पर हैकर्स का धमकी भरा संदेश भेजा गया है। पूरे डिजिटल सिस्टम पर कब्जा कर लिया गया है। हैकर्स ने सर्वर अनलॉक करने के लिए 90 लाख रुपये की मांग रखी है। उन्होंने एक बैंक खाता भी दिया है, जो जाली बताया जा रहा है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सर्वर पर फायरवॉल सुरक्षा प्रणाली लगी हुई थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाकर हैकर्स अंदर घुस गए। आईटी टीम तुरंत रिकवरी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जबकि साइबर सेल के अधिकारी हैकर्स की पहचान करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।

इस हमले से अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। मरीजों के पुराने रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, उपचार विवरण और अन्य महत्वपूर्ण डेटा अनुपलब्ध हो गए हैं, जिससे इलाज में भारी परेशानी हो रही है। कई मरीजों को तत्काल जांच रिपोर्ट और दवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

अधिकारियों का बयान  
अस्पताल प्रबंधन ने कहा, “हमारी प्राथमिकता मरीजों की सेवा बिना रुके जारी रखना है। हम जल्द से जल्द सर्वर को रिस्टोर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। साइबर सेल के साथ मिलकर हम इस मामले को गंभीरता से जाँच कर रहे हैं।”

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के संस्थानों पर ऐसे हमले बढ़ रहे हैं क्योंकि यहां संवेदनशील मेडिकल डेटा होता है, जिसका दुरुपयोग आसानी से किया जा सकता है।

जांच जारी  
चंद्रपुर साइबर सेल के अधिकारी अभी भी हैकर्स के आईपी एड्रेस, उनके लोकेशन और इस्तेमाल किए गए टूल्स का पता लगाने में जुटे हैं। पुलिस ने तकनीकी सहायता के लिए राज्य स्तर की टीम को भी सूचित कर दिया है।

अस्पताल प्रशासन ने सभी मरीजों और उनके परिजनों से अपील की है कि वे धैर्य रखें। आवश्यक आपातकालीन सेवाएं फिलहाल मैन्युअल तरीके से दी जा रही हैं।

यह घटना स्वास्थ्य क्षेत्र में साइबर सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पर एक बार फिर सवाल खड़ा करती है।
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