चंद्रपुर: आंबेडकर जयंती पर युवक की चाकू से हत्या! डीजे पर झगड़ा, 5 गिरफ्तार

⚫ आंबेडकर जयंती पर रक्तरंजित हुआ चंद्रपुर!
⚫ गांधी चौक में डीजे के ताल पर शुरू हुआ झगड़ा, 35 वर्षीय युवक की चाकू से निर्घृण हत्या
⚫ धक्का-मुक्की से खून तक... पांच आरोपी गिरफ्तार, कानून-व्यवस्था पर सवाल



चंद्रपुर (महाराष्ट्र) : डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती का उत्साह पूरे शहर में छाया हुआ था। हजारों अनुयायी, युवा, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता भव्य रैलियों में शामिल होकर सामाजिक समता और संविधान के शिल्पकार को नमन कर रहे थे। लेकिन उसी जश्न को हिंसा ने रक्तरंजित कर दिया। 14 अप्रैल की मध्यरात्रि को गांधी चौक में डीजे के ताल पर नाचते युवकों के बीच छोटी-सी धक्का-मुक्की का विवाद इतना भयानक रूप ले लिया कि एक निर्दोष व्यक्ति की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी गई।

घटना का पूरा सच:
इंदिरानगर स्थित भीमरत्न बहुउद्देशीय युवा संस्था की ओर से आयोजित रैली मध्यरात्रि के करीब गांधी चौक पहुंची। यहां डीजे की धुन पर युवा जोर-जोर से नाच रहे थे। अचानक कुछ युवकों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। शुरू में इसे मामूली बातचीत का विवाद समझा गया, लेकिन कुछ ही पलों में situation बेकाबू हो गई। गाली-गलौज और मारपीट शुरू हो गई।



इसी बीच शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे निर्दोष   रविकांत टेम्बुरकर (35 वर्ष)  शिकार हो गए। गवाहों के अनुसार, रविकांत सिर्फ झगड़ा रोकने के लिए आगे आए थे। लेकिन आक्रामक युवकों ने उन पर अचानक चाकू से वार कर दिए। वार इतने घातक थे कि रविकांत गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

इस हादसे में एक अन्य युवक अनिकेत गलबले  भी घायल हुआ है। उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई:  
घटना की सूचना मिलते ही चंद्रपुर की स्थानीय गुन्हे शाखा की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत छानबीन शुरू की और मात्र कुछ घंटों में **पांच आरोपियों** को जिनके नाम  रिहान पठान, सुहान पठान, जीशान शेख समेत अन्य दो युवक  बादल भसारे और चेतन सोनोने को गिरफ्तार कर लिया है। प्राथमिक पूछताछ में आरोपियों ने अपराध कबूल भी कर लिया है। पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

सवालों की बौछार:  
  • - सार्वजनिक रैली में युवकों के पास चाकू जैसी धारदार हथियार कैसे पहुंच गए?  
  • - इतने बड़े कार्यक्रम में पुलिस और प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं तैनात की?  
  •  - डीजे की आड़ में बेकाबू हो रही युवा भीड़ पर किसका नियंत्रण था?

चंद्रपुर शहर में आंबेडकर जयंती पर यह पहली बार हुआ है जब उत्सव हिंसा में बदल गया। जिस महापुरुष ने जीवनभर समता, बंधुत्व और कानून के राज की बात की, उसी दिन ऐसी अमानवीय घटना देखकर पूरा शहर सदमे में है।

पुलिस का बयान:  
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा, “आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” लेकिन सिर्फ गिरफ्तारी भर काफी नहीं। अब सवाल यह है कि आगे ऐसे कार्यक्रमों में सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता, युवाओं में हिंसक प्रवृत्ति और कानून-व्यवस्था की ढिलाई का जीता-जागता सबूत है। आंबेडकर के विचारों का सच्चा सम्मान तभी होगा, जब ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जाए।

नोट:  लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए न्यूज की हेडिंग फोटो बदल दी गई है। हमारा मकसद सच्ची खबर लोगों तक पहुंचना है किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।
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