85 छात्रों का सम्मान , रफ़ी अहमद किदवाई स्कूल में शाही नौजवान वेलफेयर कमेटी का उत्तम आयोजन!

⚫ 85 मेधावी छात्रों का जोशीला सम्मान! रफ़ी अहमद किदवाई स्कूल में छाई प्रेरणा की बहार!



चंद्रपुर : घुटकाला स्थित रफ़ी अहमद किदवाई स्कूल शुक्रवार को गर्व और उत्साह से गूंज उठा। भारी बारिश की चुनौती के बावजूद जिले के विभिन्न विद्यालयों के 85 होनहार छात्र-छात्राओं को १०वीं एवं १२वीं कक्षा की उत्कृष्ट सफलता के लिए सम्मानित किया गया। मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित करने पर पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर गया।

इंजीनियर अमजद शेख के जन्मदिन के अवसर पर शाही नौजवान वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 85 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रफ़ी अहमद किदवाई स्कूल के अध्यक्ष रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर शफ़ीक अहमद ने की। मंच पर प्रमुख रूप से शहीद टीपू सुल्तान विचार मंच के अध्यक्ष इंजी. अमजद शेख, डॉ. नियाज़ खान, शाहीन शेख, अहमद सिद्दीकी, शाही नौजवान वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष इमरान खान और इंजी. जुबेर आजाद उपस्थित रहे।

इंजी. अमजद शेख ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा, “१०वीं-१२वीं के बाद उच्च शिक्षा के नए रास्ते अपनाएं और जिले में उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाएं। देश की सबसे बड़ी परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी अभी से शुरू कर दें। जल्द ही हम छात्रों के लिए एक बड़ा आयोजन करने जा रहे हैं।”

 



रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर शफ़ीक अहमद छात्रों की सफलता देखकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “अधिक से अधिक शिक्षा प्राप्त करें और एक अच्छा इंसान बनकर समाज की सेवा करें।” उन्होंने शाही नौजवान वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को सही दिशा देते हैं और युवाओं में अच्छे गुणों को प्रोत्साहित करते हैं।

भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। विशेष आयोजन समिति की अध्यक्षता सादिक शेख ने की, जबकि अनीस कुरैशी, इरशाद शेख, दानिश खान, इमरान शेख, अज़हर शेख, समीर अली, सीबू शेख, शोबू शेख, हाजी फैसल पाशा और शाहिद कीड़िया ने आयोजन में अथक मेहनत की। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध एंकर नौशाद सिद्दीकी ने किया।

शाही नौजवान वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष इमरान खान ने प्रेस नोट के माध्यम से सभी का आभार व्यक्त किया।

यह कार्यक्रम मात्र 85 छात्रों का सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज-सेवा के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण साबित हुआ।
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