⚫ चंद्रपुर की पांच नगरपालिकाओं के चुनाव पर लटकी तलवार
⚫ 50% आरक्षण सीमा पार करने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा ऐतिहासिक फैसला
चंद्रपुर, 25 नवंबर : आज सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ जिस फैसले का इंतजार पूरे महाराष्ट्र की सांस थामे बैठा है, उसका सीधा असर चंद्रपुर जिले की पांच बड़ी नगरपालिका परिषदों के चल रहे चुनाव पर पड़ने वाला है। बल्लारपुर, ब्रह्मपुरी, भद्रावती, घुग्घुस और राजुरा – इन पांचों जगहों पर आरक्षण का आंकड़ा 50% की लक्ष्मण रेखा को पार कर चुका है। सबसे ज्यादा बल्लारपुर में तो 61% तक पहुंच गया है।
चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों के होश उड़े हुए हैं। प्रचार के वाहन सड़कों पर कम दिख रहे हैं, पर्चे-बैनर छपना लगभग बंद हो चुके हैं। एक उम्मीदवार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पैसे खर्च कर रहे थे, अब लगा कि सब व्यर्थ हो जाएगा। कोर्ट ने अगर चुनाव ही रद्द कर दिए तो क्या फायदा?”
कहां कितना आरक्षण?
- बल्लारपुर : 61%
- घुग्घुस : 59%
- भद्रावती : 55%
- ब्रह्मपुरी : 52%
- राजुरा : 52%
इन आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि ओबीसी को 27% आरक्षण देने के बाद SC-ST और महिलाओं का आरक्षण जोड़ते ही कुल आंकड़ा 50% से ऊपर चला गया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ट्रिपल टेस्ट और एम्पिरिकल डेटा के बिना यह आरक्षण असंवैधानिक है।
सिर्फ पांच नहीं, पूरे जिले पर संकट
चंद्रपुर जिला परिषद और चंद्रपुर महानगरपालिका के आने वाले चुनाव भी इस फैसले की जद में हैं। दोनों जगह आरक्षण 50% से ज्यादा है। जिले की दस अन्य नगरपालिकाओं और एक नगर पंचायत में अभी सीमा के अंदर है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई तो पूरे जिले का चुनावी कैलेंडर ही बदल सकता है।
तेलंगाना का भूत फिर घूम रहा
राजनीतिक पंडित तेलंगाना का उदाहरण दे रहे हैं। वहां मागासवर्ग को 42% आरक्षण देने से कुल आरक्षण 67% हो गया था। हाईकोर्ट के एक झटके में पूरा चुनाव स्थगित करना पड़ा था। चंद्रपुर में भी वही डर साफ दिख रहा है।
चार साल बाद मिली थी राहत, अब फिर अंधेरा?
इन नगरपालिकाओं में प्रशासक राज चार साल से चल रहा था। उम्मीदवारों को लगा था कि अब जनता के बीच जाकर अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे, लेकिन 50% की यह दीवार फिर बीच में आ खड़ी हुई है।
कल 26 नवंबर को निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह मिलने हैं। 2 दिसंबर को मतदान और 3 दिसंबर को मतगणना तय है। लेकिन आज दोपहर सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आएगा, उसी के आधार पर यह पूरा शेड्यूल या तो लागू होगा या कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगा।
चंद्रपुर की सियासी हवा में एक ही सवाल गूंज रहा है –
“50% की लक्ष्मण रेखा टूटेगी या चुनाव?”
आज शाम तक सब साफ हो जाएगा।
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