"लोकतंत्र पर हमला बंद करो, काला कानून वापस लो!"
- घुग्घुस में महाविकास आघाड़ी की गर्जना
घुग्घुस: महाराष्ट्र की महायुति सरकार द्वारा पारित विशेष जन सुरक्षा विधेयक 2024 के खिलाफ बुधवार, 10 सितंबर 2025 को घुग्घुस शहर के गांधी चौक पर महाविकास आघाड़ी ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर 12 से 1 बजे तक चले इस आंदोलन में कांग्रेस, शिवसेना (उभाठा), और राष्ट्रवादी शरद चंद्र पवार पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरकार विरोधी नारे लगाए और बैनर-पोस्टरों के साथ 'लोकतंत्र की हत्या' करने वाले इस काले कानून को रद्द करने की मांग की।
नेतृत्व और जनता का गुस्सा
प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस तालुका अध्यक्ष अनिल नरुले, शहर अध्यक्ष राजूरेड्डी, शिवसेना (उभाठा) शहर प्रमुख बंटी घोरपड़े, वरिष्ठ नेता गणेश शेंडे, राष्ट्रवादी शरद चंद्र पवार पार्टी के युवा शहर अध्यक्ष शरद कुमार और वरिष्ठ नेता सत्यनारायण डाकरे ने किया। प्रदर्शनकारियों ने महायुति सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस कानून को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।
क्या है विशेष जन सुरक्षा विधेयक 2024?
महायुति सरकार ने इस विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद में पारित किया है, और राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद यह कानून लागू हो जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कानून शहरी नक्सलवाद पर अंकुश लगाने के लिए है, लेकिन महाविकास आघाड़ी ने इसे अस्पष्ट और दमनकारी करार दिया। इस कानून के तहत:
- - सरकार बिना स्पष्ट परिभाषा के किसी भी संगठन को अवैध घोषित कर सकती है।
- - अवैध संगठन की चल-अचल संपत्ति जब्त की जा सकती है।
- - संगठन के पदाधिकारियों और बैठकों में शामिल लोगों को 7 साल तक की सजा हो सकती है।
- - शांतिपूर्ण मार्च, भूख हड़ताल, या ट्रेड यूनियन गतिविधियों को अवैध ठहराया जा सकता है।
महाविकास आघाड़ी का आरोप
महाविकास आघाड़ी का कहना है कि यह कानून सामाजिक आंदोलनों, जनांदोलनों, और विपक्षी दलों को कुचलने का हथियार बनेगा। उनका आरोप है कि सरकार इस कानून का दुरुपयोग सामाजिक कार्यकर्ताओं को परेशान करने और राज्य के संसाधनों (जमीन, जंगल, बंदरगाह आदि) को उद्योगपतियों को सौंपने के खिलाफ उठने वाली जनता की आवाज को दबाने के लिए करेगी।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
आंदोलन में शिवसेना के चेतन बोबडे, अमित बोरकर, लक्ष्मण बोबडे, हेमराज बावने, कांग्रेस के सैयद अनवर, शामराव बोबडे, मुन्ना लोहानी, अलीम शेख, अजय उपाध्ये, जगन्नाथ असवले, किशोर आवले, रोशन दांतलवार, शहजाद शेख, शेख शमीउद्दीन, राजकुमार वर्मा, सिनू गुडला, कल्याण सोडारी, पद्मा त्रिवेणी, दुर्गा पाटिल, दीप्ति सोनटक्के, संध्या मंडल, पूनम कांबले, प्रीति तमगाडगे, भाविका आटे, जोया शेख, आकाश चिल्का, सुनील पाटिल, अरविंद चहांडे, और अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।
महाराष्ट्र में व्यापक विरोध
यह प्रदर्शन केवल घुग्घुस तक सीमित नहीं था। पूरे महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी ने इस काले कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरकर सरकार को चेतावनी दी। कार्यकर्ताओं ने कहा, "हम लोकतंत्र को कुचलने वाले इस कानून को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार को इसे तत्काल रद्द करना होगा।"
आगे की रणनीति
महाविकास आघाड़ी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह कानून वापस नहीं लिया, तो पूरे राज्य में और बड़े स्तर पर आंदोलन किए जाएंगे। यह प्रदर्शन न केवल एक कानून के खिलाफ था, बल्कि यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का प्रतीक था।
निष्कर्ष
घुग्घुस के गांधी चौक पर हुआ यह विरोध प्रदर्शन महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। महाविकास आघाड़ी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस 'काले कानून' के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और जनता के साथ मिलकर इसे रद्द कराने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
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