आसिम वकार ने AIMIM छोड़ कांग्रेस जॉइन की, कहा— बीजेपी के खिलाफ असली लड़ाई राहुल गांधी लड़ रहे हैं!
नई दिल्ली: हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे आसिम वकार अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय, यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के चेयरमैन इमरान प्रतापगढ़ी की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
कांग्रेस जॉइन करने के बाद आसिम वकार ने अपने फैसले के पीछे की वजह साफ करते हुए कहा, “हमारी लड़ाई उन लोगों की है जो देश से प्यार करते हैं। बीजेपी को उखाड़ फेंकना है। MIM में रहते हुए मुझे लगा कि बीजेपी को हटाना जरूरी है, लेकिन पार्टी बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ती, बल्कि कांग्रेस पर निशाना साधती है। इसलिए मैं कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं। असल में अगर कोई बीजेपी से लड़ रहा है तो वह राहुल गांधी हैं।”
उन्होंने हुमायूं कबीर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही उन्हें बीजेपी का एजेंट बताया था। बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर भी उन्होंने दावा किया कि इसे बीजेपी बनवा रही है। स्ट्रिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कबीर ने 1100 करोड़ रुपये मिलने की बात कही थी। “हमारी सरकार आएगी तो इसकी जांच करवाएंगे। मैं सच, सही, देश और धर्मनिरपेक्षता के साथ हूं। मैं यहां टिकट के लिए नहीं आया हूं। मैंने 20 साल समाजवादी पार्टी में बिताए। अखिलेश यादव भी नहीं कह सकते कि मैंने कभी ट्रांसफर-पोस्टिंग की बात की हो,” वकार ने जोर दिया।
इस मौके पर यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि देश में सभी वर्गों के लिए आंदोलन चल रहा है और लोकतंत्र को बचाने के लिए राहुल गांधी लड़ रहे हैं। “राहुल गांधी से प्रभावित होकर आसिम वकार ने कांग्रेस जॉइन किया है।”
उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने वकार का स्वागत करते हुए कहा, “हम इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मैं आपको मुबारकबाद देता हूं। आज एक मजबूत व्यक्ति की ज्वाइनिंग हुई है। वह हमेशा प्रखरता और वाकपटुता के साथ समाज को संदेश देते हैं। उनकी सोच कांग्रेस के साथ मिलती है।”
आसिम वकार का यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस में आने के उनके कदम को कई लोग विपक्षी एकता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
