सफाई कर्मचारी नहीं तो शहर की सेहत भी नहीं!
शेरसिंह डागोर ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी!
“कोरोना में जान जोखिम में डालकर सेवा की, अब उनकी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं”
नियमित स्वास्थ्य जांच, 5 लाख का बीमा, न्यूनतम वेतन और घरकुल की तुरंत गारंटी दो!
चंद्रपुर, 9 सितंबर
शहर की सड़कें साफ हैं, नालियां साफ हैं, समाज स्वस्थ है… लेकिन यह सब संभव है उन सफाई कर्मचारियों की वजह से, जो खुद बीमारियों और कम वेतन के बोझ तले दबे रहते हैं। महाराष्ट्र राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष शेरसिंह डागोर ने बुधवार को चंद्रपुर में साफ चेतावनी दी – “इनके बिना शहर की सेहत नहीं बच सकती। अब इनके मुद्दों को संवेदनशीलता से नहीं, बल्कि गंभीरता और तेज़ी से निपटाओ।”
नियोजन भवन में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी वसुमना पंत, महानगरपालिका आयुक्त अकुनूरी नरेश, डॉ. विद्या गायकवाड समेत दर्जनों अधिकारी मौजूद थे। डागोर ने कहा, “कोरोना काल में जब पूरा शहर घरों में बंद था, तब ये कर्मचारी सड़कों पर थे। कई परिवारों के परिजन दूर होने पर इन्होंने शवों का अंतिम संस्कार भी किया। उनकी इस कुर्बानी को भूलकर उनकी उपेक्षा करना समाज के प्रति अन्याय है।”
उन्होंने अधिकारियों को तीन स्पष्ट निर्देश दिए:
- सफाई कर्मचारियों के सभी लंबित मामलों के लिए तुरंत नोडल अधिकारी नियुक्त करो।
- हर सफाई कर्मचारी की नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य करो। जिस बैंक से वेतन जाता है, उसी से 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना में मृत्यु पर 1 करोड़ रुपये का बीमा तुरंत लागू करो।
- डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रमसाफल्य योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को घरकुल देने का आराखड़ा फौरन तैयार करो।
डागोर ने लाड-पागे समिति की सिफारिशों के धीमे क्रियान्वयन पर भी नाराजगी जताई और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार सफाई कर्मियों के हित में कई फैसले ले चुकी है, लेकिन मैदान में अमल की गति सुस्त है।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अगर सफाई कर्मचारी एक दिन भी काम पर नहीं आए, तो शहर की हालत क्या होगी, यह हर अधिकारी को समझना चाहिए। इनका जीवन स्तर ऊंचा उठाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, एहसान नहीं।”
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने सभी बिंदुओं पर तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया।



