चंद्रपुर जेल में हजरत गैबीशाह वली का मुबारक उर्स 25 व 26 जून को अकीदतमंदों के लिए मजार शरीफ की ज़ियारत हेतु विशेष अनुमति

चंद्रपुर जेल में हजरत गैबीशाह वली का मुबारक उर्स
25 व 26 जून को अकीदतमंदों के लिए मजार शरीफ की ज़ियारत हेतु विशेष अनुमति



चंद्रपुर, 23 जून : चंद्रपुर जिला कारागार परिसर में स्थित हजरत मखदूम शाहबुद्दीन शाह उर्फ गैबीशाह वली की पावन मजार पर मुहर्रम के अवसर पर आयोजित होने वाला मुबारक उर्स इस वर्ष भी पूरी अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। उर्स के अवसर पर 25 एवं 26 जून को अकीदतमंदों को मजार शरीफ की ज़ियारत के लिए विशेष अनुमति प्रदान की गई है।

जेल प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला कारागार के पश्चिमी भाग में मुख्य तट क्रमांक-02 के समीप स्थित यह ऐतिहासिक और रूहानी मजार वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है। हर वर्ष मुहर्रम के दौरान यहां उर्स का आयोजन किया जाता है, जिसमें चंद्रपुर जिले सहित आसपास के अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अकीदतमंद हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।



मजार शरीफ पर आने वाले जायरीन अपनी मुरादों की पूर्ति और अमन-चैन की दुआ के लिए हाजिरी लगाते हैं। उर्स के दौरान यहां रूहानी माहौल देखने को मिलता है और विभिन्न समाजों के लोग भी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के चलते सख्त नियम लागू

उर्स के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जेल प्रशासन ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जेल परिसर में मोबाइल फोन, कैमरा, पेढ़ा, बर्फी अथवा किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

यदि किसी व्यक्ति के पास प्रतिबंधित सामग्री पाई जाती है तो उसे जेल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

प्रशासन ने की सहयोग की अपील

प्रभारी अधीक्षक, जिला कारागार चंद्रपुर ने सभी अकीदतमंदों से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी नियमों और निर्देशों का पालन करें, अनुशासन बनाए रखें तथा उर्स के दौरान अमन, भाईचारा और सौहार्द का वातावरण कायम रखने में सहयोग करें।

आस्था, भाईचारे और एकता का प्रतीक

हजरत गैबीशाह वली का मुबारक उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिससे चंद्रपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सद्भाव की मिसाल एक बार फिर देखने को मिलेगी।

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