फर्जी मौत का खेल: जिंदा महिला का खाता बंद, NSUI की FIR मांग

⚫ चंद्रपूर (पडोली) से सनसनीखेज मामला: जिंदा महिला को कागजी मौत दे दी, फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवकर बैंक खाता भी बंद कराया; दोषियों पर FIR की NSUI की मांग


चंद्रपूर: जिले के पडोली गांव में प्रशासनिक सिस्टम में सांठगांठ और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जिंदा महिला **सौ. सुगंधा बाई वसंत मडामे** को सरकारी कागजों पर मृत घोषित कर दिया गया। उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र (Fake Death Certificate) तैयार किया गया, जिसके आधार पर उनका बैंक खाता भी बंद करा दिया गया। इस गंभीर घोटाले के खिलाफ NSUI चंद्रपूर जिला अध्यक्ष **शफाक शेख** ने पडोली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सुनियोजित साजिश और बैंक खाते की बंदी
शिकायत के मुताबिक, यह कोई सामान्य प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित धोखाधड़ी है। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के जरिए जिंदा महिला के बैंक खाते को बंद करवा दिया गया। NSUI का आरोप है कि सरपंच, ग्रामसेवक और संबंधित सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं था।

 BDO जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाली खुलासे
ग्रुप डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) की जांच रिपोर्ट ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है:

- **रिकॉर्ड में कोई एंट्री नहीं**: पडोली ग्रामपंचायत की मृत्यु रजिस्टर में इस महिला की मौत की कोई प्रविष्टि ही नहीं मिली।
- **हस्ताक्षर पर विवाद**: ग्रामपंचायत विस्तार अधिकारी ने किसी भी ऑफलाइन प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है, लेकिन फर्जी प्रमाणपत्र पर उनके हस्ताक्षर और मुहर मौजूद हैं।
- **कर्मचारी ने मानी गलती**: जांच के दौरान एक कर्मचारी ने नामों की समानता के कारण मानवीय भूल होने की बात स्वीकार की।

 NSUI की मांगें और चेतावनी
शफाक शेख ने मांग की है कि दोषियों पर तुरंत **IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 166, 120-B/34** और **BNS 2023** की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाए। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • - फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर और मुहर की **फॉरेंसिक जांच** कराई जाए।
  • - ऑनलाइन पोर्टल के लॉग, यूजर आईडी और IP डिटेल्स की गहन जांच हो।
  • - दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल **सस्पेंड** कर गिरफ्तार किया जाए।

NSUI ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने तुरंत ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संगठन की ओर से जोरदार आंदोलन छेड़ा जाएगा।

यह मामला न केवल प्रशासनिक विश्वासघात का है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों पर सीधा हमला है। जांच एजेंसियों को जल्द से जल्द इस साजिश के पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचना होगा।
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