चंद्रपुर: माजरी बेरोजगारों का अल्टीमेटम, 13 नवंबर से भूख हड़ताल

माजरी कॉलरी के बेरोजगार युवा नौकरी की मांग को लेकर जिलाधिकारी को अल्टीमेटम, 13 नवंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी



चंद्रपुर, 3 नवंबर 2025: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के माजरी कॉलरी इलाके में सैकड़ों सुशिक्षित बेरोजगार युवाओं का सब्र अब जवाब दे रहा है। स्थानीय 7 चड्डा कंपनी और कैलिबर मर्केटाइल प्राइवेट लिमिटेड में नौकरी की आस लगाए बैठे इन युवाओं ने जिलाधिकारी को एक सख्त विनंती पत्र सौंपा है। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर 13 नवंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे जीएम ऑफिस के सामने धरना देंगे, उसके बाद अनशन करेंगे और अंत में अन्नत्याग तक चले जाएंगे। पत्र में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति के लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।

रोहन कुमार निशाद और अन्य स्थानीय युवाओं ने लिखे इस पत्र में दर्द भरी गुहार लगाई है। वे खुद को माजरी कॉलनी, तहसील भद्रावती के निवासी बताते हुए कहते हैं, "हम सभी सुशिक्षित बेरोजगार हैं और हमें काम की बेहद जरूरत है। चूंकि हम इसी इलाके के स्थानीय हैं, इसलिए गांव में आने वाली कंपनियों में हमें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।" उनका आरोप है कि पिछले दो सालों से कई कंपनियां यहां काम कर रही हैं, लेकिन हर बार 'आज नहीं, कल' का बहाना बनाकर उन्हें टरकाया जाता रहा। "पिछले साल वादा किया गया था कि अगले साल नौकरी मिलेगी, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हमारी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हमें इन कंपनियों में शामिल किया जाए," पत्र में विनती की गई है।

माजरी कॉलरी क्षेत्र कोयला खनन और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित साबित हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 7 चड्डा कंपनी और कैलिबर मर्केटाइल जैसी फर्मों में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ता जा रहा है। रोहन निशाद जैसे युवा, जो इंजीनियरिंग और अन्य डिग्रियों के धनी हैं, अब सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। "हमारा गांव ही हमारा बाजार है, फिर भी हमें दर-दर भटकना पड़ रहा है। यह अन्याय है," पत्र में भावुक अपील की गई है।


जिलाधिकारी कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "मामला संवेदनशील है। हम कंपनियों से बातचीत करेंगे और जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।" अगर यह विवाद बढ़ा, तो यह न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे चंद्रपुर जिले की औद्योगिक नीतियों पर सवाल खड़े कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं राज्य सरकार की 'लोकल फॉर लोकल' रोजगार नीति को चुनौती दे रही हैं।

बेरोजगार युवाओं की यह लड़ाई अब आंदोलन का रूप लेने वाली है। 13 नवंबर की डेडलाइन नजदीक आते ही इलाके में तनाव बढ़ सकता है। क्या प्रशासन समय रहते न्याय सुनिश्चित कर पाएगा, या फिर सड़कें फिर से आंदोलनों की गवाह बनेंगी? यह सवाल अब पूरे जिले के सामने मुंह बाए खड़ा है। विकास की इस दौड़ में स्थानीय युवाओं का हक कैसे बचेगा, यही आने वाले दिनों की असली परीक्षा होगी।


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