बल्लारपूर-राजुरा महामार्ग पर धूल और गड्ढों से त्राहिमाम, NHAI ने ठेकेदार को दिए सख्त निर्देश!

बल्लारपूर-राजुरा महामार्ग: धूल और गड्ढों ने नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया।

निर्माण की धीमी गति से जनता त्रस्त; NHAI ने ठेकेदार को दिए सख्त निर्देश!


चंद्रपुर: बल्लारपूर से राजुरा तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे निर्माण कार्यों ने इलाके के निवासियों, वाहन चालकों और यात्रियों की जिंदगी दूभर कर दी है। सड़क पर उड़ती धूल, जगह-जगह बने गड्ढे, बिखरे निर्माण सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था की कमी ने दैनिक आवाजाही को चुनौती बना दिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर शिवसेना बल्लारपूर शहर प्रमुख श्रेयांश संजय ठाकुर और शिवसेना राजुरा शहर प्रमुख अभयसिंह ठाकुर ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चंद्रपुर कार्यालय में लिखित शिकायत दायर की है।

दोनों नेताओं ने साफ कहा कि विकास के नाम पर नागरिकों की सुरक्षा की अनदेखी कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि निर्माण स्थल पर नियमित पानी का छिड़काव कर धूल प्रदूषण रोका जाए, खराब हुए हिस्से और गड्ढे तुरंत ठीक किए जाएं, यातायात सुचारू रखने के प्रभावी उपाय किए जाएं तथा खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, अवरोध और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए। साथ ही सड़क पर कंकरीट या अन्य निर्माण सामग्री बिखरने से रोका जाए और दुर्घटनाओं की संभावना को जल्द नियंत्रित किया जाए। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की भी मांग की गई।


NHAI के परियोजना निदेशक प्रवीण बीजेवार ने शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से चर्चा के बाद ‘जी.आर. इन्फ्रा’ प्रबंधन को नागरिकों की समस्याएं तुरंत दूर करने और जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है।

लेकिन सिर्फ निर्देश और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। अब असली परीक्षा यह है कि धूल, गड्ढे, यातायात व्यवधान और दुर्घटना का खतरा असल में कम हुआ या नहीं। सार्वजनिक निर्माण के हर चरण पर नागरिक सुरक्षा सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि ठेकेदार और परियोजना टीम की भी बुनियादी जिम्मेदारी है। निर्देश कागजी रह जाते हैं या जमीन पर उतरते हैं, इसकी निगरानी अब जरूरी हो गई है।

श्रेयांश ठाकुर और अभयसिंह ठाकुर ने साफ कर दिया है कि नागरिकों की सभी मांगें पूरी होने तक वे लगातार फॉलो-अप करते रहेंगे। बल्लारपूर-राजुरा महामार्ग के निर्माण में खामियों पर प्रशासन कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है, इसकी असली परीक्षा अगले कुछ दिनों में ही होगी।
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